बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या आजकल काफी आम हो चुकी है। जब ये ग्रंथियाँ सूज जाती हैं या बार-बार संक्रमण होता है, तो बच्चे को गले में दर्द, निगलने में परेशानी, मुँह से साँस लेना, खर्राटे या रात में बेचैनी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। कई माता-पिता इन लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक अनदेखा करने पर यह बच्चे की नींद, सांस लेने और स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
इस ब्लॉग में हम सरल भाषा में समझेंगे कि टॉन्सिल और एडेनॉइड क्या होते हैं, बच्चों में ये समस्या क्यों होती है, किन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है, और सबसे महत्वूपर्ण — कब डॉक्टर से दिखाना चाहिए। यह जानकारी माता-पिता को सही समय पर निर्णय लेने और बच्चे की समस्या को गंभीर होने से पहले पहचानने में मदद करेगी।
बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड की सामान्य समस्याएँ
बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या मुख्य रूप से संक्रमण और बढ़ते इम्यून सिस्टम से जुड़ी होती है। जब ये ग्रंथियाँ सूज जाती हैं, तो कई तरह के लक्षण सामने आते हैं जो बच्चे की सांस, नींद और दिनचर्या को प्रभावित कर सकते हैं।
टॉन्सिलाइटिस— टॉन्सिल की सूजन
टॉन्सिल में सूजन या संक्रमण होने पर बच्चे में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- गले में दर्द
- निगलने में परेशानी
- लगातार खाँसी या जलन
- बुखार
- गर्दन की ग्रंथियों में सूजन
एडेनॉइडाइटिस— एडेनॉइड की सूजन
एडेनॉइड की समस्या ज्यादातर साँस लेने और नींद से जुड़ी होती है:
- नाक से साँस लेने में दिक्कत
- मुँह से साँस लेना
- खर्राटे या disturbed sleep
- नाक बंद रहना
- बार-बार कान का infection
दोनों समस्याएँ साथ होने पर
कुछ बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड दोनों प्रभावित होते हैं, जिससे:
- साँस लेने में और ज्यादा कठिनाई
- दिन में थकान
- चिड़चिड़ापन
- स्कूल में ध्यान कम लगना
बच्चों में टॉन्सिल की समस्या के प्रमुख लक्षण
बच्चों में टॉन्सिल की समस्या का एक आम कारण है संक्रमण (Tonsillitis) जो गले के दोनों तरफ मौजूद टॉन्सिल को सूज देता है और उन्हें दर्द भरा बनाता है। अक्सर लोग इसे सामान्य गले की खराश समझ लेते हैं, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
कुछ जरूरी लक्षण जो ध्यान देने योग्य हैं:
- गले में दर्द और जलन: बच्चा निगलते समय दर्द की शिकायत करता है और कभी-कभी खाना खाने के दौरान भी दर्द होता है।
- टॉन्सिल का सूजन: टॉन्सिल लाल और मोटे हो जाते हैं और कभी-कभी उनपर सफेद या पीले धब्बे भी दिखाई देते हैं।
- भोजन करने में दिक्कत: बच्चा सॉलिड खाना खाने से बचता है क्योंकि उसे खाने में दर्द होता है या बार-बार पानी पीता है।
- बुखार: संक्रमण के दौरान बच्चे का तापमान बढ़ जाता है और कई दिनों तक रहता है।
- मुँह से बदबू आना: टॉन्सिल पर पस जमने की वजह से सांस में बदबू आती है और कभी-कभी बच्चा खाना खाने के बाद भी बदबू की शिकायत करता है।
- गले में कर्कश आवाज या भारीपन: बच्चा बात करते समय अपनी आवाज बदल देता है या उसकी आवाज मेंभारीपन आता है।
- थकान और चिड़चिड़ापन: संक्रमण के दौरान बच्चा कम सक्रिय और चिड़चिड़ा हो जाता है और कभी-कभी वह चुपचाप रहता है।
अगर बच्चा टॉन्सिल की समस्या को बार-बार झेल रहा है, बुखार बार-बार आता है या खाने-पीने में परेशानी लगातार बनी रहती है, तो यह संकेत हो सकता है कि समस्या बढ़ रही है और ENT विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। समय पर चिकित्सा मदद लेने से टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या गंभीर होने से बच सकती है और बच्चे की दिनचर्या और नींद बेहतर हो जाती है।
एडेनॉइड की समस्या के लक्षण
एडेनॉइड नाक के पीछे मौजूद एक लिम्फेटिक टिश्यू है, जो बच्चों में संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। जब यह ग्रंथि बढ़ जाती है या बार-बार संक्रमित होती है, तो बच्चे को कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं। बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या अक्सर साँस लेने और नींद से जुड़ी परेशानियों के रूप में दिखाई देती है।
मुख्य लक्षण जिन पर माता-पिता ध्यान दें:
- नाक से सही साँस न ले पाना: बच्चा अक्सर मुँह से साँस लेने लगता है क्योंकि नाक का रास्ता संकरा हो जाता है।
- लगातार नाक बंद रहना: बिना सर्दी-जुकाम के भी नाक बंद रहना एडेनॉइड संकेत हो सकता है।
- खर्राटे लेना और disturbed sleep: रात में तेज़ खर्राटे, बेचैनी या बार-बार नींद टूटना आम लक्षण हैं।
- मुँह से साँस लेना: लंबे समय तक ऐसा रहने पर चेहरे की बनावट पर भी असर पड़ सकता है (adenoid facies)।
- बार-बार कान में संक्रमण या दर्द: एडेनॉइड Eustachian tube पर दबाव डालकर कान में fluid buildup कर सकता है।
- नाक से बोलना: बच्चा बोलते समय आवाज नाक से निकलती हुई लगेगी।
- बदबूदार सांस: लगातार मुँह से साँस लेने के कारण।
इन लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि untreated एडेनॉइड समस्या बच्चे की नींद, वृद्धि (growth), सांस लेने और स्कूल परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती है। अगर लक्षण 3–4 हफ्तों से अधिक समय तक बने रहें या बार-बार रिपीट हों, तो ENT Specialist से जांच करवाना सबसे बेहतर विकल्प है।
कब समझें कि समस्या गंभीर है? — डॉक्टर से तुरंत दिखाएँ
बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड्स की समस्या शुरुआत में हल्की रहती है लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है। अगर नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो आपको ENT स्पेशलिस्ट से जल्दी सलाह लेनी चाहिए।
1. साँस लेने में कठिनाई
सबसे ज्यादा बुरी बात यह है जब बच्चा नाक से सांस लेने की बजाय मुंह से सांस ले रहता है। यह एडेनॉइड्स की सूजन का एक बहुत ही आम संकेत हो सकता है। सांस लेने में बाधा नींद और शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को भी प्रभावित कर सकती है।
2. रात में खर्राटे या सांस रुकना
नींद के दौरान खर्राटे आना या बार बार सांस रुकना या जगना स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है। यह टॉन्सिल और एडेनॉइड्स की समस्या से जुड़ा हो सकता है।
3. निगलने में परेशानी या भोजन छोड़ना
अगर बच्चा खाने या पानी निगलते समय दर्द महसूस करता है या खाने से बचने लगता है, तो यह टॉन्सिल्स की सूजन का संकेत हो सकता है।
4. लगातार या बार बार संक्रमण
यदि 3-4 हफ्तों में बार बार गले में संक्रमण, बुखार या लगातार टॉन्सिलिटिस होता है, तो यह संकेत देता है कि समस्या पुरानी (Chronic) बन रही है और आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
5. कान के बार-बार संक्रमण
एडेनॉइड्स की सूजन नाक और कान के बीच की ट्यूब (Eustachian Tube) को प्रभावित कर सकती है। इससे बच्चे को बार-बार Ear Infection और सुनने में कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
6. बच्चे के व्यवहार या ऊर्जा में बदलाव
कम ऊर्जा, चिड़चिड़ापन, ध्यान में कमी और दिनभर थकान — यह खराब नींद के कारण हो सकता है, जो टॉन्सिल और एडेनॉइड्स की समस्या से जुड़ा हो सकता है।
टॉन्सिल और एडेनॉइड का इलाज
बच्चों में टोंसिल और एडेनॉइड की समस्या का इलाज उनकी स्थिति के आधार पर, लक्षणों की गंभीरता और बार-बार होने वाले संक्रमण पर निर्भर करता है। करीब ९९ प्रतिशत बच्चे शुरुआती अवस्था में केवल दवाएं और घरपर देखभाल से ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में एडेनॉइड या टोंसिल सर्जरी की भी जरूरत पड सकती है।
1. घर पर देखभाल
हल्के संक्रमण और सूजन के समय बच्चे का इलाज घर पर भी किया जा सकता है, जैसे-
- ठंडे पानी पीना
- हल्का , मुलायम खाना खाना
- अच्छी तरह नींद लेना
- बड़े बच्चों के लिए नमक वाले पानी का गरारा करना (जो गले की जलन को कम करने और दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है)
2. दवाओं द्वारा इलाज
अगर संक्रमण बैक्टीरिया के कारण हुआ हो तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएँ दे सकते हैं। लेकिन वायरल संक्रमण में दवाएं केवल लक्षणों को कम करने पर ध्यान देती हैं, जैसे कि बुखार, दर्द या सूजन। डॉक्टर अक्सर बंद नाक या दम घुटने के लिए नेजल स्प्रे और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएँ भी लिखते हैं जो एडेनॉइड की सूजन कम करने में मदद करते हैं।
3. सर्जरी की जरूरत कब होती है?
कुछ बच्चों में टोंसिल और एडेनॉइड बार-बार सूजते हैं, या संक्रमण बार-बार लौट आता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज का ऑपरेशन कराने की सलाह दे सकते हैं, खासकर अगर-
- बच्चा सोते समय खर्राटे लेता हो
- साँस रुकने जैसी स्थिति (Sleep Apnea) दिख रही हो
- बच्चा निगलने में कठिनाइयों का सामना कर रहा हो
- बार-बार कान का संक्रमण हो रहा हो
- साल में कई बार टोंसिलाइटिस हो जाता हो
इन हालातों में सर्जरी से बच्चे की नींद, साँस लेने और सामान्य स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। जैसे कि टोंसिल और एडेनॉइड की सर्जरी आजकल सुरक्षित, तेज और आधुनिक तकनीकों के साथ की जाती है और बच्चे जल्दी ठीक हो जाते हैं।
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निष्कर्ष
बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या का पता चलते ही उन पर काबू पाया जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि अगर बच्चा लगातार गले में दर्द, रात में खर्राटे, सांस लेने में मुश्किल और लगातार बीमारी हो रही है, तो इसे सामान्य सर्दी ही समझ कर बिना ध्यान दिए नहीं छोड़ दें। टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या बच्चे की नींद खराब करने, सांस लेने में कठिनाई और स्कूल में समायोजन करने में भी अड़चनें पैदा कर सकती है। इसलिए सही समय पर ENT विशेषज्ञ से बात करना सबसे सही और सुरक्षित उपचार का मार्ग है। और आज दवाओं, सर्जरी जैसे कई उपचार उपलब्ध हैं जो बच्चों को शांति और जीवन की गुणवत्ता में सुधार दिलाते हैं। इसलिए लक्षणों को समझें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह जरुर लें।
Frequently Asked Questions
1. बच्चों में टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या के क्या मुख्य लक्षण होते हैं?
टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या में बच्चों को गले में दर्द, निगलने में दिक्कत, मुँह से साँस लेना, खर्राटे, बंद नाक और रात में बेचैनी जैसी शिकायतें होती हैं। कुछ बच्चों में बार-बार बुखार और कान का संक्रमण भी देखा जाता है।
2. क्या हर बच्चे में टॉन्सिल या एडेनॉइड की सर्जरी ज़रूरी होती है?
नहीं, हर बच्चे को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। हल्के संक्रमण या सूजन में दवाओं और home-care से काफी सुधार हो जाता है। सर्जरी तब की जाती है जब समस्या बार-बार लौट आए, नींद प्रभावित हो या साँस लेने में रुकावट हो।
3. टॉन्सिल और एडेनॉइड की सर्जरी सुरक्षित है या नहीं?
आजकल यह सर्जरी आधुनिक तकनीकों के साथ की जाती है और बच्चों के लिए काफी सुरक्षित मानी जाती है। अधिकतर बच्चे कुछ दिनों में सामान्य गतिविधियों में लौट आते हैं और नींद व साँस लेने में स्पष्ट सुधार देखा जाता है।
4. क्या टॉन्सिल और एडेनॉइड की समस्या बढ़ने पर बच्चे की नींद भी खराब हो सकती है?
हाँ, सूजन या blockage होने पर बच्चे को रात में खर्राटे, मुँह से साँस लेना और बार-बार जागना जैसी समस्याएँ होती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति Sleep Apnea जैसी समस्या भी पैदा कर सकती है, जिसमें डॉक्टर की सलाह ज़रूरी होती है।
5. कब डॉक्टर से दिखाना चाहिए?
अगर बच्चा लगातार 3-4 दिनों तक बुखार, गले में दर्द, निगलने में दिक्कत, साँस रुकने जैसी समस्या या बार-बार टॉन्सिलाइटिस से परेशान हो, तो तुरंत ENT Specialist से सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर इलाज से जटिलताएँ रोकी जा सकती हैं और बच्चा जल्दी ठीक होता है।
